ब्लोगिंग जगत के पाठकों को रचना गौड़ भारती का नमस्कार

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शनिवार, 20 सितंबर 2008

संदेश


गुटर-गूं गुटर-गूं करके बोला
सफेद कबूतर का एक जोड़ा
तुम मुझे निहारो मैं तुम्हें निहारूं
निकट से निकटतम हो जाएं थोड़ा
वृक्ष हरा भरा है,लताएं भी हैं बिखरीं
आओ मिलकर खाएं,बोलों की मीठी मिसरी
कल फिर जुदा होंगें, दूर उड़ानों में खोएंगें
बीत रहा जो पल उसे हृदयागम कर लें
निगाहों को अपनी आज मन का दर्पण कर लें
फिर सुबह से शाम का मिलने का वादा कर लें
दोनों की कंठध्वनियों का शोर
डाल के हर पत्ते को रहा झकझोर
जैसे दोनों पूछ रहें हों
क्या तुम ऊंची उड़ानों में मेरे साथ आओगे
अपनी एक सैर को यादगार बनाओंगें
इनके लिए अनमोल थीं ये घड़ियां
जीवन लम्बा हो मगर टूटे न ये लड़ियां
एक-एक पल को दोनों ने चोंच में दबाया था
इन पक्षयओं ने तभी से मानव तक
एक प्रेम संदेश पहुंचाया था

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया!!

वर्ड वेरिपिकेशन हटा लें तो टिप्पणी करने में सुविधा होगी. बस एक निवेदन है.


डेश बोर्ड से सेटिंग में जायें फिर सेटिंग से कमेंट में और सबसे नीचे- शो वर्ड वेरीफिकेशन में ’नहीं’ चुन लें, बस!!!