ब्लोगिंग जगत के पाठकों को रचना गौड़ भारती का नमस्कार

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सोमवार, 1 सितंबर 2008

खुदा के फ़ज़ल से

जिसे भी कुछ मिला है खुदा के फजल से
खानाबदोशियां भी खुदा के फजल से

गिद्धों ने भी कहीं बनाए हैं घोंसले
सारा जहां गिद्ध बना खुदा के फजल से

बेबाक न होइए मंजर जिन्दगी देखकर
सदा सुन लेगा कोई खुदा के फजल से

सब्र बड़ा चाहिए ऐतबार भी
‘भारती’
सब कुबूल होगा खुदा के फजल से

5 टिप्‍पणियां:

अबरार अहमद ने कहा…

बढिया। भावनाएं और आशा का बढिया तालमेल। लिखते रहें।

Rakesh Kaushik ने कहा…

it's really nice

hume bhi aap mile Khuda ke fazal se


bahut achcha likha hai aapne, bhavnaye kafi prabhavitkarti hai

Rakesh Kaushik

Ajit B. Gadhvi ने कहा…

kya khub likha hei, aapki "gazal "
zindagi se mukabla karane ki prarana deti he.

bebak na ho..... ye pankti to bahut pasand aai.

शरद तैलंग ने कहा…

रचना जी
आपकी ग़ज़लें देखीं । आप्की अभिव्यक्ति तो अच्छी है किन्तु ग़ज़लें ग़ज़ल के नियमों पर खरी नहीं है। जैसे ’खुदा के फ़जल से’ से गज़ल में रदीफ़”खुदा के फ़ज़ल से’ है किन्तु काफ़िया मतले में ’है तथा भी आ रहा है। फिर पहले शेर में ’बना’आ गया उसके अगले शॆर में ’कोई’ आ गया फ़िर ’होगा’। इसमें काफ़िया दोष तो है ही बहर में भी नहीं है। कृपया अन्यथा न लें
शरद तैलंग

ऊर्दू दुनिया ने कहा…

खुदा की कायनात का
खुदा ही जिम्मेदार है.