ब्लोगिंग जगत के पाठकों को रचना गौड़ भारती का नमस्कार

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गुरुवार, 30 अक्तूबर 2008

माहोसाल

ख्वाबों ख्यालों की दुनियां में रहने वाले
अपनी तन्हांयों को बेहद चाहने वाले
जाने किस दुनियां को ढूंढ्ते हैं
इंसानों से तो बनाकर दूरियां
सन्नाटों को पनाह देते हैं
अपने कमरों को बन्द करके फिर
खिड़कियां दिमाग की खोलते हैं
गांवों को शहरों में तब्दील कर
दरिया मैखानों से जोड़ते हैं
जिन्दगी को बदस्तूर जीकर भी
अपना हर एक पल माहोसाल बना देते हैं ।

4 टिप्‍पणियां:

डा. फीरोज़ अहमद ने कहा…

http://vangmaypatrika.blogspot.com
http://rahimasoomraza.blogspot.com
आपके ब्लाग से मेरा ब्लाग नहीं खुल रहा है, क्योंकि आपने वाडमय लिख रखा है.

MANVINDER BHIMBER ने कहा…

ख्वाबों ख्यालों की दुनियां में रहने वाले
अपनी तन्हांयों को बेहद चाहने वाले
जाने किस दुनियां को ढूंढ्ते हैं
इंसानों से तो बनाकर दूरियां
सन्नाटों को पनाह देते हैं
bahtreen rachana

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया!!

amrit ने कहा…

क्या बात है, बहुत लोग इसमें खुद को निहार रहे हैं