ब्लोगिंग जगत के पाठकों को रचना गौड़ भारती का नमस्कार

Website templates

समर्थक

शनिवार, 26 सितंबर 2009

रावण की चाहत





















सभी ब्लोगर पाठकों को दशहरे की हार्दिक शुभकामना
एक बार रावण का कुछ मूड बदला
उसका ध्यान अंतरंगता की ओर लपका
अपने दसों सिरों से
चुंबनों की इच्छा जागी
दस्यु सुन्दरियों के लिए
विज्ञापन निकाला,
बना अनुरागी
सुन्दरियां आयीं, इंटरव्यू हुए,
रावण के चुनाव घोषित हुए
विज्ञापन में पहले ही छपा था,
सुन्दरियों को भी पता था
कमसिन, दुबली कन्याएं चाहिएं थीं,
जगह की कमी बताई गई थी
हर सिर के आगे प्रत्येक को खड़ा होना था,
भीड़ बढ़ गई
रावण ने ये सोचा न था
यूं घिर जाएगा सुन्दरियों से कि
सिर के सिर से जुड़े होने से
सांस लेना मुश्किल होगा
खैर ! कामुक बली ने
नरसंहार तो बहुत किए थे मगर
आज से पहले न कभी
महाराज ऐसे चक्कर में पड़े थे
चुबंनों के लिए दस्युओं ने जैसे ही अधर मिलाए
दसों सिर कंपित हुए, सीधे बस शिवजी याद आए

18 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

वाह क्या बात है बहुत खूब रावण भी सांसत मे

समयचक्र - महेंद्र मिश्र ने कहा…

क्या बात है .... रावण के लिए इस मसले पर दस सर होना भी अखर गया होगा .....

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

यहाँ तो रावण की दस सिर समस्या बन गयी..बढ़िया रचना!!

Nirmla Kapila ने कहा…

हा हा हा बहुत बदिया जी बधाई

कमलेश शर्मा ने कहा…

Nice.....
Bechara..... Ravan.

Dr Ankur Rastogi ने कहा…

भारती जी, वाह, बहुत मजेदार परिकप्ल्पना है, विशेषकर जब टेलिविज़न पर रियलिटी स्वयंवर का दौर है. अगर कभी फुर्सत में मूड करे तो इसे और विस्तार दें. बहुत कुछ और कहा जा सकता है. आभार. मेरे ब्लॉग पर आने का भी धन्यवाद. आगे भी मार्गदर्शन मिलेगा, यही अपेक्षा है.

sangeeta ने कहा…

hahahhhaaaaaaa....bahut khoob....achchhi kalpna hai...

media ka falspha ने कहा…

shandar

गंगू तेली ने कहा…

Sundar baat...
Niymit likhna aur achha likhna, dono hi dushkar karyo me aap nipun hai..
meri anant shubhkamnaye..

http://gangu-teli.blogspot.com

दिगम्बर नासवा ने कहा…

BAHOOT KHOOB ......... ACHHA LIKHA HAI HAASY KA SUNDAR SANGAM HAI ....

Aacharya Ranjan ने कहा…

Bahut achcha...

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

शिवजी के पास आखिर जाकर वरदान क्या मांगेगा................

बहुत सुन्दर प्रस्तुति, रावण का भागना यूँ पसंद आया..........

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

Rajender Chauhan ने कहा…

Bahut khub....aap ne to Ravan ko bhi pachaad diya...
Rgds,
Rajender
http://rajenderblog.blogspot.com

Dr.R.Ramkumar ने कहा…

रचना जी ,
मैं आपको फालो कर रहा हूं इसलिए आपकी रचनाएं पढ़ता रहता हूं। कृपया मेरी गद्य रचनाओं की संवीक्षा करने के लिए इस साइट पर जाएं
http://drramkumarramarya.blogspot.com,

ग़ज़ल के लिए ‘कुमार ज़ाहिद’ की साइट की पड़ताल करें।
http://kumarzahid.blogspot.com,
आप संपादिका हैं ,रचना-धर्मी हैं । आपकी नज़रों से अच्छी रचनाएं नहीं छूटनी चाहिएं इसलिए गुस्ताखी कर रहा हूं, असपकसे साइट बता रहा हूं,
मार्ग पंशस्त करती रहें।

Dr.R.Ramkumar ने कहा…

rachna achchhi hai .nice..

sid ने कहा…

haha... bahut khoob

prasann pranjal ने कहा…

mera namskar

bahut khub likha hai aapne ise padhkar mai apni hasi rok nahi paya

Akhtar Khan Akela ने कहा…

aadrniy behn rchnaa ji jesaa naam vesi hi rchnaayen kotaa men is trh kaa lekhn chupaa he pdh kr mn gdgd ho gyaa meri bdhaai svikaar kren. akhtar khan akela kota rajasthan