ब्लोगिंग जगत के पाठकों को रचना गौड़ भारती का नमस्कार

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रविवार, 19 अप्रैल 2009

धूप

तू धूप बन छम से बिखर
सोये अन्तर्मन को स्पर्श कर
बिखर कर पुंकेसर सी कणकण में
रश्मियों से नवजीवन सहर्ष कर
धुंधली हो गई पारदर्शिता कुंदन की
पारस बन मूर्छित मन पुर्नजीवित कर
पसर गईं हैं दूर क्षितिज़ में आशाएं
दर्पण बन मृगमरीचिका से मुक्त कर
टुकड़े-टुकड़े धूप को हमने लपेटा
आज सूरज बन अंतः रौशन कर

18 टिप्‍पणियां:

AAKASH RAJ ने कहा…

बिखर कर पुंकेसर सी कणकण में
रश्मियों से नवजीवन सहर्ष कर
धुंधली हो गई पारदर्शिता कुंदन की
पारस बन मूर्छित मन पुर्नजीवित कर

बहुत ही सुन्दर भावना, अच्छा लिखा है आपने .........

अनिल कान्त : ने कहा…

bhaavon se bhari hui rachna ...mujhe bahut achchhi lagi

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति!!

shyam kori 'uday' ने कहा…

... प्रभावशाली रचना!!!!!!!!

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

भावना प्रधान , अच्छी रचना .

मोना परसाई "प्रदक्षिणा" ने कहा…

टुकड़े-टुकड़े धूप को हमने लपेटा
आज सूरज बन अंतः रौशन कर
सुंदर भावनाएं सहज अभिव्यक्ति .

Neeraj ने कहा…

धुंधली हो गई पारदर्शिता कुंदन की
पारस बन मूर्छित मन पुर्नजीवित कर

Wah! kya khoob likha hai...

Priya ने कहा…

bes mam, dhoop bankar hi bikharna chahti hoo. aapne mere profile par aakar saraha ....bahut bahut shukriya

RAJNISH PARIHAR ने कहा…

टुकड़े-टुकड़े धूप को हमने लपेटा .....बहुत ही दिल से की गयी अभिवयक्ति है...जो दिल को छूती है...

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बहुत ही सुन्दर.

ऋषभ कृष्ण ने कहा…

sadaiv kee tarah ek aur achchhi rachna.

ज्योति सिंह ने कहा…

बहुत सुन्दर. भाव पूर्ण रचना. बधाई.

सुनील पाण्‍डेय ने कहा…

रचना जी आपने बहुत अच्‍छा लिखा, रचना की एक-एक लाईनों में गहराई है, झकास---
आपकी पत्रिका के बारे में हमने सुना था, लेकिन संयोगवश पढने को नहीं मिली।अगर दिल्‍ली में किसी तरह उपलब्‍ध हो जाए तो अच्‍छा होगा।क्रिपया आप अपना ई-मेल आईडी से भी संपर्क कर सकते हैं।
सुनील पाण्‍डेय
नई दिल्‍ली
09953090154

kumar ने कहा…

शानदार कविता है। कृपया पुर्नजीवित शब्द को ठीक कर लें। साहित्य में अशुद्धि से प्रवाह बाधित होता है। अगली रचनाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

Pankaj Narayan ने कहा…

अच्छी लगी कुछ और पढ़कर बताऊंगा, विस्तार से... बशीर बद्र का शेर रिमिक्स करके बोलूं तो ब्लॉगर हो तुम भी, ब्लॉगर हैं हम भी। हर पोस्ट पर अब मुलाकात होगी
पंकज नारायण

kabad khana ने कहा…

aap wakai me bahut hi gr8 rachnaye likhti hai mujhe bhi apka margdarshan pradan kariye/..........
satyarth mishra
17 years
class 12th me hu i m a new blogger

गिरिजेश राव ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Harsh ने कहा…

bahut sundar rachna likhi haia aapne bhaav gahare hai