ब्लोगिंग जगत के पाठकों को रचना गौड़ भारती का नमस्कार

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शनिवार, 28 नवंबर 2009

समरूपताएं


तितलियों और लड़कियों की
अजीब समरूपताएं
अलियों और लड़कों को
पीछे-पीछे भगाएं
इन्द्रधनुष रंगों से सजें
छेड़ने की इन्हें सजाएं
रंग छोड़ें, रंग बदलें
रंगेहाथों पकड़वाएं
इठलाती उड़ती फिरें
मन ही मन लुभाएं
पंख पसारे उड़ती जाएं
अलियों को तड़पाएं
दूर रहें हाथ न आएं
यही इनकी विदू्रपताएं

शुक्रवार, 13 नवंबर 2009

‘बेटा’ एक शब्द















‘बेटा’शब्द एक मार्मिक अहसास
मां के अन्तर्मन का विश्वास है
आत्मा से आत्मा का बंधन
बेटे से मां बाप का यही नाता है
सौ जन्मों से अधिक ममता से
मां का हृदय जब बेटा बुलाता है
कर्ज और फर्ज से बंधा जन्म ले
बेटा जब मां के आंचल में आता है
मां के दूध का कर्ज, वंशबेल का फर्ज
परवरिश व संस्कारों से ही चुकाता है
वहन करता प्यार, विश्वास, जिम्मेदारी
बाप के कंधे से कंधा वो मिलाता है
जब कोई बाप बेटे का हमराज बनता है
तभी बेटे का मूल, पोते का ब्याज पाता है
भाग्यवान है जिसने जीवन में बेटे का कंधा पाया
परलोक के लिए जिसके बेटे ने अपना कंधा लगाया

सोमवार, 2 नवंबर 2009

मदद














एक झिंगुर आया
मेरी तर्जनी उठी उसे
उसकी दिशा में नचाया
गोल गोल वर्तुलाकार
भयभीत सी आंखें
विचलित मन:स्थिति थी
कभी वो नीचे तो मैं
पलंग पर चढ़ी थी
गोल चमकती आंखों से
उसने मुझको देखा
मैं तो बहुत छोटा हूं
मुझ से भय कैसा
राम हनुमान सभी पुकारे
लोग कमरे में बैठे सारे
कोई नहीं मदद को आया
झिंगुर ही दिमाग में
वो पंक्तियां लाया
जो अपनी मदद आप हैं करते
भगवान भी उनकी मदद को आ धमकते