ब्लोगिंग जगत के पाठकों को रचना गौड़ भारती का नमस्कार

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सोमवार, 2 नवंबर 2009

मदद














एक झिंगुर आया
मेरी तर्जनी उठी उसे
उसकी दिशा में नचाया
गोल गोल वर्तुलाकार
भयभीत सी आंखें
विचलित मन:स्थिति थी
कभी वो नीचे तो मैं
पलंग पर चढ़ी थी
गोल चमकती आंखों से
उसने मुझको देखा
मैं तो बहुत छोटा हूं
मुझ से भय कैसा
राम हनुमान सभी पुकारे
लोग कमरे में बैठे सारे
कोई नहीं मदद को आया
झिंगुर ही दिमाग में
वो पंक्तियां लाया
जो अपनी मदद आप हैं करते
भगवान भी उनकी मदद को आ धमकते

15 टिप्‍पणियां:

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

सुन्दर सन्देश,
मगर झींगुर बेचारा
खाम-खा गया मारा....

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

झींगुरी माया.

वाणी गीत ने कहा…

अपनी मदद आप करने वाले को भगवन भी सहायता प्रदान करते हैं ...
जान लिया ..!!

ओम आर्य ने कहा…

बढिया!

sangeeta ने कहा…

chaliye jhingur ke bahane bhagwan to yaad aaye....
sachcha sandesh deti hui rachna.....badhai

Deepak Rawat ने कहा…

:)

Yugal Mehra ने कहा…

झिंगुर पर लिखी कविता अच्छी लगी।

Murari Pareek ने कहा…

लगता है ये कविता आपने झींगुर से प्रेरित होकर लिखा है | अच्छी लगी!!!

रचना दीक्षित ने कहा…

गोल चमकती आंखों से उसने मुझको देखा मैं तो बहुत छोटा हूं मुझ से भय कैसा

रचना जी मेरे ब्लॉग पर आने और सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आभार
वाह जी वाह क्या किस्मत पायी इस झींगुर ने
आभार रचना दीक्षित

devendraduniya ने कहा…

bhut achchhi kavita lagi
maim mai bhi blog par aa gya hoon

prasann pranjal ने कहा…

bahut badhiya

ashutoshdeexit ने कहा…

jhingur ne agar apni pyaari si 'chiki-miki' ki dhwani nikali hoti, to shayad kissa kuchh aur hi hota.

hindi mein tippani (comment) likhna batayen!

महावीर ने कहा…

झींगुर से प्रेरित होकर यह कविता वास्तव में ही सराहनीय है.
महावीर शर्मा

MD. SHADAB ने कहा…

Very good mam

sanjay ने कहा…

this is a good & nice poem
rashmidixit 7 samblog-sanjay. blogspot.com