ब्लोगिंग जगत के पाठकों को रचना गौड़ भारती का नमस्कार

Website templates

समर्थक

सोमवार, 15 दिसंबर 2008

चंद शेर

असर
पूछे सुबहे विसाल जब हमारा हाल
पसीने से दुपट्टा भीग जाता है
शमां अंधेरो में जलाते है, इसका
असर परवानो पे क्यों आता है

पुकार
कतरा-कतरा दस्ते दु‌आ पे न्यौछावर न होता
जो तेरे शाने का को‌ई हिस्सा हमारा भी होता
हम तो मस्त सरशार थे अपनी ही मस्ती में
यूं बज़्म में बैठाकर तुमने गर पुकारा न होता

दुहाई
ज़मीं आस्मां से पूछती है
मेरे आंचल में सारी कायनाथ रहती है
चांद तो दागी है फिर भी
खूबसूरती की दुहा‌ई
इसी से क्यों दी जाती है

19 टिप्‍पणियां:

अशोक मधुप ने कहा…

शमां अंधेरो में जलाते है, इसका
असर परवानो पे क्यों आता है
बहुत अच्छे शेर।बधाई

"अर्श" ने कहा…

bahot hi badhiya sher likha hai aapne dhero badhai aapko...




arsh

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत बढिया!!

पूछे सुबहे विसाल जब हमारा हाल
पसीने से दुपट्टा भीग जाता है
शमां अंधेरो में जलाते है, इसका
असर परवानो पे क्यों आता है

बहुत अच्छे शेर।बधाई

mehek ने कहा…

waah bahut khub sundar sher

Shashwat Shekhar ने कहा…

कतरा-कतरा दस्ते दु‌आ पे न्यौछावर न होता
जो तेरे शाने का को‌ई हिस्सा हमारा भी होता
बहुत खूब | शाने का कोई हिस्सा ! बहुत अच्छे

Vidhu ने कहा…

हम तो मस्त सरशार थे अपनी ही मस्ती में
यूं बज़्म में बैठाकर तुमने गर पुकारा न होता
ye panktiyaan sundar hai ..

Amit ने कहा…

bahut accha..khaa kar ye waala..
शमां अंधेरो में जलाते है, इसका
असर परवानो पे क्यों आता है...
bahut he bhadiya hain.....

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

रचना गौड़ जी
शेरों में नवीनता है

ज़मीं आस्मां से पूछती है
मेरे आंचल में सारी कायनाथ रहती है
चांद तो दागी है फिर भी
खूबसूरती की दुहा‌ई
इसी से क्यों दी जाती है

अच्छा लगा
आपका
विजय

हिमांशु ने कहा…

"हम तो मस्त सरशार थे अपनी ही मस्ती में
यूं बज़्म में बैठाकर तुमने गर पुकारा न होता"

खूबसूरत शेर लिखे हैं आपने . धन्यवाद.

pintu ने कहा…

बहुत सुंदर अच्छा लगा मै आप से थोड़ा नाराज भी हूँ आप कही और आकर हमसे पूछ लो!

Harsh pandey ने कहा…

bahut achcha likha hai aapne
aisa hi likhte rahiye aap

प्रकाश बादल ने कहा…

अचछा प्रयास जारी रखें। आप और भी बेहतर लिख सकती हैं

धीरेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

bahut hi khubsurti se aur acha likha kaphi acha laga ..

अबयज़ ख़ान ने कहा…

पूछे सुबहे विसाल जब हमारा हाल
पसीने से दुपट्टा भीग जाता है
शमां अंधेरो में जलाते है, इसका
असर परवानो पे क्यों आता है
बहुत ही बेहतरीन शेर है। आपने मेरी हौसलाअफ़ज़ाही की इसके लिए बहुत शुक्रिया। क्या मैं आपको अपने ब्लॉग के साथ शामिल कर सकता हूं।

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

वाहवा..... बढ़िया हैं जी.. साधुवाद स्वीकारें..

PURAN SINGH BARAGAON ने कहा…

AAPKE LIKHE HUYE SHER BAHUT HI ACCHE HAI... ISKE LIYE MERI TARAF SE ADAB ARZ. PLEASE AISE HI SHER O SHAYARI LIKHTE RAHE..

MERE BLOG KE BARE ME RAY DIJIYE

sanams hot cake ने कहा…

Rachnaji ,aap apne nam ko sarthak kar rahi hai |meri badhai sweekar kare.mere apne blog pr aapki aahat mujhe achi lagi .waqt-waqt pr apni upasthati darj karati rahiyega .nav-varsh ki ane-ka nek "
subhkamna"
sanjay sanam

Ashish Chaudhary ने कहा…

yaqeenan ek arthwan rachna he..

chetan anand ने कहा…

aap mere blog par aain, shukria. apki rachnain zarur padhunga. chetan anand