ब्लोगिंग जगत के पाठकों को रचना गौड़ भारती का नमस्कार

Website templates

समर्थक

शनिवार, 6 दिसंबर 2008

ज़मीर

राजस्थान पत्रिका परिवार परिशिष्ट दिनांक 3.12.08 में प्रकाशित
चलो आज कुछ आभास खरीद लाऊं
वो मेरे करीब आ मुझसे हाथ मिलाए
और मैं खुश हो जाऊं
जैसे उस दिन बूढ़े को खाना खिलाने
पर हुआ था
खुश हो आगे बढ़ हाथ मिलाया था
और जब अधनंगे बच्चों को मैने
पुराने कपड़े दिए तब हुआ था
हां! तब भी जब स्टेशन पर
फटे कपड़ों से पगली की झांकती
अस्मिता को ढंका था
मुझे पता है स्वार्थ वहीं खड़े खड़े
सब तक रहा था, अपने थके कदमों से
पालथी मारने की कोशिश उसकी
और ‘वो’ मुझसे दो फर्लागं दूर हो गया था
उफ! ये बार बार का आना जाना उसका
क्या जरूरी है उपकार करती रहूं
पर बिना स्वार्थ उपकार भी कहां होता है
मैं भी उसके करीब होने के लिए उपकार करती हूं
क्योंकि मुझको मेरा जमीर बहुत प्यारा लगता है
ये मेरा स्वार्थ है पुण्य कमाने के लिए
तभी वो कभी पास कभी दूर रहता है

25 टिप्‍पणियां:

anu julka ने कहा…

पर बिना स्वार्थ उपकार भी कहां होता है

Bahut hi prabhavit krti hai ....
karwi sachhayi hai yeh. jo bahut kamm log hi sweekar kr paate hain.

राहुल सि‍द्धार्थ ने कहा…

वाह!! बहुत बढ़िया...

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

बहुत खूब! आपकी पत्रिका भी पढी, बधाई!

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

Wah
aapne bataya nahi ki rachnaen aapko mili ya nahi.......?

संतोष कुमार सिंह ने कहा…

आप की राय अपेक्षित हैं,------ दिलों में लावा तो था लेकिन अल्फाज नहीं मिल रहे थे । सीनों मे सदमें तो थे मगर आवाजें जैसे खो गई थी। दिमागों में तेजाब भी उमङा लेकिन खबङों के नक्कारखाने में सूखकर रह गया । कुछ रोशन दिमाग लोग मोमबत्तियों लेकर निकले पर उनकी रोशनी भी शहरों के महंगे इलाकों से आगे कहां जा पाई । मुंबई की घटना के बाद आतंकवाद को लेकर पहली बार देश के अभिजात्य वर्गों की और से इतनी सशंक्त प्रतिक्रियाये सामने आयी हैं।नेताओं पर चौतरफा हमला हो रहा हैं। और अक्सर हाजिर जवाबी भारतीय नेता चुप्पी साधे हुए हैं।कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि आजादी के बाद पहली बार नेताओं के चरित्र पर इस तरह से सवाल खङे हुए हैं।इस सवाल को लेकर मैंने भी एक अभियाण चलाया हैं। उसकी सफलता आप सबों के सहयोग पर निर्भर हैं।यह सवाल देश के तमाम वर्गो से हैं। खेल की दुनिया में सचिन,सौरभ,कुबंले ,कपिल,और अभिनव बिद्रा जैसे हस्ति पैदा हो रहे हैं । अंतरिक्ष की दुनिया में कल्पना चावला पैदा हो रही हैं,।व्यवसाय के क्षेत्र में मित्तल,अंबानी और टाटा जैसी हस्ती पैदा हुए हैं,आई टी के क्षेत्र में नरायण मुर्ति और प्रेम जी को कौन नही जानता हैं।साहित्य की बात करे तो विक्रम सेठ ,अरुणधति राय्,सलमान रुसदी जैसे विभूति परचम लहराय रहे हैं। कला के क्षेत्र में एम0एफ0हुसैन और संगीत की दुनिया में पंडित रविशंकर को किसी पहचान की जरुरत नही हैं।अर्थशास्त्र की दुनिया में अमर्त सेन ,पेप्सी के चीफ इंदिरा नियू और सी0टी0 बैक के चीफ विक्रम पंडित जैसे लाखो नाम हैं जिन पर भारता मां गर्व करती हैं। लेकिन भारत मां की कोख गांधी,नेहरु,पटेल,शास्त्री और बराक ओमावा जैसी राजनैतिक हस्ति को पैदा करने से क्यों मुख मोङ ली हैं।मेरा सवाल आप सबों से यही हैं कि ऐसी कौन सी परिस्थति बदली जो भारतीय लोकतंत्र में ऐसे राजनेताओं की जन्म से पहले ही भूर्ण हत्या होने लगी।क्या हम सब राजनीत को जाति, धर्म और मजहब से उपर उठते देखना चाहते हैं।सवाल के साथ साथ आपको जवाब भी मिल गया होगा। दिल पर हाथ रख कर जरा सोचिए की आप जिन नेताओं के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं उनका जन्म ही जाति धर्म और मजहब के कोख से हुआ हैं और उसको हमलोगो ने नेता बनाया हैं।ऐसे में इस आक्रोश का कोई मतलव हैं क्या। रगों में दौङने फिरने के हम नही कायल । ,जब आंख ही से न टपके तो फिर लहू क्या हैं। ई0टी0भी0पटना

SALEEM AKHTER SIDDIQUI ने कहा…

AAPKI KAVITAYEN BAHUT UMDA HAIN. AGAR IJAZAT HO TO MAIN APNE AKHBAR CHAP DOON.

mala ने कहा…

अत्यन्त गंभीर विचार , अच्छा लगा !आपकी पत्रिका भी पढी, बधाई!

AMAR NATH GIRI 'AKASH' ने कहा…

APKA BLOG PAHALI BAR DEKHA. BAHUT ACHCHHA LAGA. SAMPARK KE LIYE DHANYAWAD.

pintu ने कहा…

बहुत सुंदर रचनाये है आपकी पढ़ कर मजा आ गया!आप लोगो से आजकल थोड़ा दूर हूँ जिसे की मुझे आप लोगो से संपर्क बनाने में थोडी देर हो जाती है लेकिन मै जल्द ही लोट आऊंगा !http://pinturaut.blogspot.com/"http://janmaanas.blogspot.com/

संत शर्मा ने कहा…

Sahi kaha aapne "Swarth to har haal me pichcha nahi chodti" lekin swarth ka dyara jaise jaise vyapak hota jata hai, usme pavitrata badhti jati hai. Very nicely illustrated poem., Keep writing.

niranjan ने कहा…

bahut khub likhi hain mam.

शुभम आर्य | ने कहा…

बहुत बढ़िया, यथार्त का बोध होता है |
धन्यवाद |

आपका विभास ने कहा…

aapki kawita badi marmsparshi hai... aapki patrika bhi padhi... ek patrika ko online kar dena waakai kaabile taarif hai...

mere blog per aapka sandesh dekha tha... mera blog padhne ke liye dhanyawaad

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

आपकी सभी कवितायें पढीं !
अच्छी कवितायें हैं !

मेरी हार्दिक शुभ कामनाएं !

Ankur Maheshwari ने कहा…

namste..
bada achha laga ..
jab koi shuruaat kare ..aur uspar phir koi comment kare ..
ji ..me aap ke paas bundi ka rhane wala hun..
ji .. dhanyawad .. aap aaye aur mujhe padha ..

kuldeep kumar mishra ने कहा…

hi
aap ne hamara blog dekha, iske liye ham aapke aabhari hai. ham aapse Email ke jariye sampark rakhna chahte hai. Ham leout Designer hain, aur ek akhbar me kaam karte hai.
My Email- kk.mishra10@gmail.com

ananya ने कहा…

आदरणीया'भारती' जी ,
आपका रचना संसार निश्चित रूप से अनुपम है।
मैंने आपकी अद्यतन रचनाएँ ' ज़मीर ' ,'तोहफा' और 'बाबुल की बेटी 'पढ़ीं।
लगा कि मैं ज़िन्दगी की वास्तविकता को अपनी हथेली पर रखकर साक्षात्कार कर रहा हूँ ।
आपकी रचनाएँ काव्य प्रेमियों के लिए चिरकाल तक प्रेरणादायी बनी रहेंगी ।
मैं आपको व आपके रचना संसार को नमन करता हूँ !
आपके द्वारा प्रेषित 'वाणी वंदना 'पर प्रोत्साहन स्वरुप टिपण्णी के रूप में शुभकामनाएँ प्राप्त हुईं जिनके लिए आपको कोटिशः धन्यवाद!
निश्चित ही आपकी प्रेरणाएं हमारा संबल होंगी।
कृपया हमारी साईट देखकर हमें अनुगृहीत करती रहें।

gkindian ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
gkindian ने कहा…

Hindi blog men ye mera pahla anubhav hai ki hindi blog bhi itne acche hoten hai.
Aapse bahut kuch seekhna hai. Manay many congratulations for making such a wonderful blog. I had read your magzine also. A very good collection of article and poems, just like all plowers in one garlend.

manu ने कहा…

abhi tthahar ke likhoonga..........
hai ab bhi muntzir mere khyaal ka sayaa,
jise bulayaa tha ghar mein wo hi naheen aaya...

मुकेश कुमार तिवारी ने कहा…

पुण्य लाभ स्वार्थ के साथ?

बहुत गहरी चोट है छद्म परोपकरियों पर जिनके हाथ ज्यादा ही दिखते हैं आखबारी तस्वीरों में बनिस्बत मदद लेनेवालों से.

" मैं भी उसके करीब होने के लिये उपकार करती हूँ " अंतर्मन में छायी हुई भावनों को प्रभावी रूप से प्रकट करता है.

मुकेश कुमार तिवारी

सुप्रतिम बनर्जी ने कहा…

ना आप मेरे ब्लॉग पर पधारती और ना ही मुझे इतनी जल्दी आपके ब्लॉग का पता चलता। सबसे पहले तो शुक्रिया और फिर इस शानदार रचना की मुबारकबाद।

PCG ने कहा…

बहुत ही बढ़िया !

JHAROKHA ने कहा…

Rachanaji,
Apne meree rachnaen padhee,unkee sarahna kee .bahut bahut dhanyavad.Asha hai bhavshya men bhee hamara utsah badhaengee.
Apkee jameer kavita to dil ko gahraiyon tak chhoone vali hai.Badhai.
Poonam

धीरेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

आपने जो लिखा वो काफी उत्साहवर्धक और मन में जोश भरने वाला है .