ब्लोगिंग जगत के पाठकों को रचना गौड़ भारती का नमस्कार

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रविवार, 22 अगस्त 2010

सावन का महीना


आज वो दरिया ही बेईमानी कर गया
ज़ज़्बातों का पानी जिसमें बहता था
भिगोने के लिए जिसे एक चुल्लू न मिला
साथी चला गया और सावन का महीना था


दुनिया-----
सर पर आस्मां रहे न रहे
पैरों तले ज़मीं की जरूरत नहीं हमें
हम तो उस दुनिया में चले गए हैं
अब सांस रहे न रहे इसका ग़म नहीं हमें

रविवार, 15 अगस्त 2010

तिरंगे की लाज

Myspace Indian Flag Graphics Independencec Day Clipart




नाज़ करें हम तुम पर जितना
ओ देश के नौजवान
तिरंगे की आन हो तुम
तिरंगे की जान हो तुम
कलाई का एक चीर तुम्हारे हाथ है
बहन का वो प्यार सदा तुम्हारे साथ है
इस चीर की लाज बचाना है
धर वापस जीतकर तुम्हें आना है
हर मां बहन की आंख में यही एक आस है
मेरे प्यारे नौजवान जीत या कफन तुमहारे साथ है
मॉं की दुआएं बेकार न हो
जिस जमीन के जर्रे जर्रे को
शहीदों ने खून से सींचा हो
उस पर दुश्मन का अधिकार न हो
जय हिन्द जय भारत
भारत देश के स्वतंत्र देशवासियों को मेरा नमन !