आंखों में जलते दीप लिए हर मंजिल पर तुम्हारा साथ चाहिए कुछ प्यार का अहसास चाहिए रहें गर दो पल मेहरबां तो हर जन्म का साथ चाहिए तब चाहे रास्ते पर कांटे मिलें या खुशियों भरी रातें मिलें प्यार हमारा सच्चा हो बस इतना सा इम्तहां चाहिए
हर चीज बयां ये करती हैं कुछ बात अनोखी लगती है चुप सी इन झील सी आंखों में तिर आयी नमी क्यों लगती है तब दिल उदास हो जाता है जब उनकी याद सताती है लम्बी ठण्डी सी इन रातों में लबों पे खामोशी छा जाती है रुक रुक के सांस यूं चलती है तस्वीर देखकर ख्वाबों में परछाई गवाही देती है हर चीज बयां ये करती है
आज हर आदमी रोटी को मोहताज़ बना कुछ ढूंढ रहा है उसकी वो मिठास जो कहीं पर खो गई है शायद,काश मिल जाए हर किसी की रोटी से तोड़ता है एक कौर कि कहीं इसमें तो नहीं आज समय कुछ ऐसा है जब कड़ी मेहनत से पसीना बहाकर आज के कोलाहल की प्यास वो रिश्तों की बली से बुझा रहा है माहौल कुछ बन गया ऐसा कि गुज़र बसर की जगह के लिए लाशों को किनारे लगा रहा है अपनी भूख प्यास मिटाने के लिए देखो आदमी आदमी को खा रहा है
बरखा की रुनझुन में नाचे बावरा मोरा मन बादलों से आंख मिचौली करती सुनहरी किरण तन पर पड़-पड़ चमकाए निखर उठे यौवन का हर रंग नाचें गाएं मोर पपीहे हम भूले जीवन का रूदन भौंरें मंडराये पुष्पों पर होए परितृप्त मन की बुझन पुलकित हो उठे बयार जब पहली बरखा से भीगे आंगन कितनी ही ऋतुएं बदले पर बदले न सजनी का साजन