ब्लोगिंग जगत के पाठकों को रचना गौड़ भारती का नमस्कार

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बुधवार, 26 नवंबर 2008

बाबुल की बेटी

सागर सा हृदय रख बुत में
खुदा ने बेटी बना दिया
अपने चूल्हे की आग से
किसी का चूल्हा जला दिया
न दर मिला न दयार
बाबुल ने तुलसी बना दिया
नाजों से पाल पोस के
बेटी को ब्याह दिया
जनम दिया जमाने को
नया युग बना दिया
हर दुख बांटे बेटी फिर भी
दुनिया कहे क्या किया
इत उत डोली जाए बेचारी
रिशतों ने सुख दुख भुला दिया

सोमवार, 24 नवंबर 2008

फ्रेम

जिन्दगी की तस्वीर अधूरी क्यों
बिना प्रेम खाली है फ्रेम क्यों ?
वो पल जो किसी मौन को तोड़े
उस पल के लिए चैन अधीर क्यों ?
कितने कागज लिख लिख मरोड़े
एक शब्द पर ही रूकी कलम क्यों ?
जिससे काटे नहीं कटी हो अब रैन
उसके चित्रपट पर तुम आ जाओ
पूरी हो जाएगी तस्वीर
भर जाएगा फ्रेम

गुरुवार, 6 नवंबर 2008

मज़ार

आये थे मज़ार पर वो,
दुनियां बदल जाने के बाद।
सर झुकाया भी तो,
हमारे गुज़र जाने के बाद।
अरमां ये थे रू-ब-रू हो,
कुछ तो कह देते ।
बुदबुदाए भी आखिर तो ,
दम निकल जाने के बाद।
हुआ रश्क भी उन पर तो,
फितरत बदल जाने के बाद।
किया इज़हार भी तो,
अलविदा ! कहने के बाद।

रविवार, 2 नवंबर 2008

हावी मन

मन का जब कोई तार उलझकर खुलता है
कमल नयनों से नीर धार में बहता है
कुछ मखमली बिछौने हम भी उधार ले आएं
मेरे आंचल का कोना तो भीगा रहता है
मन की वीणा का जब कोई तार बजता है
रोम-रोम झंकृत कर एक नया ही सुर बनता है
खामोशी,एकांत ने हमें सदा ही लुभाया है
साथ इनके रहकर ही यादों का तांता रहता है
चितचोर बन कोई मन में समाए रहता है
बिन रूप आकृति के मन हम पर हावी रहता है ।