ब्लोगिंग जगत के पाठकों को रचना गौड़ भारती का नमस्कार

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गुरुवार, 29 अक्तूबर 2009

बंटवारा





















हाफ पेन्ट की अदला बदली
किया कंचों का था बंटवारा
क्यों जवां होकर बढ़ी दूरियां
हुआ जायदाद का बंटवारा
लड़ जाते थे हर किसी से
था अपना भाई सबसे प्यारा
दुनियां की ऐसी हवा चली
मीठा खून लगे अब खारा
थे जो मां के राम लखन
किया था संग कुल का उजियारा
आज बनकर रावण विभीषण
कर दिया कुल का ही बंटवारा
खींच रेखा संबंधों में अपने
जीते जी कौशल्या को मारा
स्वर्ग से सुन्दर घर को तोड़
तेरा-मेरा घर कर डाला

15 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार ने कहा…

bantware ka dard samete achchhi rachna

आपके सवाल ने कहा…

khubsurat kavita... har khyaal ka jawaab hai humare paas.... just visit http://yourquestionanswer.blogspot.com/

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है।
सुन्दर भाव हैं। बधाई।

M VERMA ने कहा…

स्वर्ग से सुन्दर घर को तोड़
तेरा-मेरा घर कर डाला
बहुत सुन्दर भाव

sid ने कहा…

Ati uttam rachna!! padhte padhte humari peedhi ke log jinhone batware ka dard nahi saha hai, wo bhi us dard ko samajh payenge aapki rachna ke dwara

महफूज़ अली ने कहा…

bahut achchi lagi yeh kavita..... sunder abhivyakti hai.....

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aapka mere blog 'communique analysis' par diye gaye comment ke liye aapka aabhaari hoon......

kripya isey bhi dekhen....

www.lekhnee.blogspot.com

radhasaxena ने कहा…

parivartan niyam hai.sundar rachana.

VIVEK SACHAN"Aviral" ने कहा…

thanx a lot bharthi ji fr vistng n gv complmnt
mai apke bare me khna chahuga ki apka energy levl bhut ucha hai

रवि धवन ने कहा…

हाफ पेन्ट की अदला बदली
किया कंचों का था बंटवारा
वाह!
बचपन के दिन याद आ गए...क्यों नहीं हम मिलकर रहते...कुछ दुष्टों ने ईश्वर की सुन्दर रचना पर दाग लगा दिया है.

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

सुंदर रचना के लिये साधुवाद स्वीकारें...

mera anubhav ने कहा…

Rachna jee sarvpratham aapko is sunder kavita ke lie badhai.
Batvare ka dard jis andaj se bayan kiya gya hai usse anayas he apne dada jee ke ajade vale vo sansmarn yad a gye jo unhone hamsab se bate the. man chachot utha. kabhe samay mile to visit karke margdarshan kare
www.nyeanubhav.blogspot.com

बालकृष्ण अय्य्रर ने कहा…

रचना जी टिप्पणी के लिये धन्यवाद, ब्लोग जगत मे बस अभी अभी आय हुं. आप साहित्य की दुनिया से है आपको शायद मेरा ब्लोग http://iyerexpressions.blogspot.com/
पसंद आये.

kant sharan ने कहा…

kash ye dard hamare swarthi or bati hui jamin par rajniti karnewale neta log samajh pate hai.
khubsurat abhivyakti

Seema Bisht ने कहा…

Rachna ji apki Shishyaa ho gai hu..... bahut sunder tarike se samaaj ki kuritiyo ko darshaaya hai.

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......